"धर्म की रक्षा के लिए उठाया गया शस्त्र कभी पाप नहीं होता —
वह स्वयं धर्म का स्वरूप है।"
जो न्याय के पक्ष में खड़ा हो,
उसे ईश्वर स्वयं शक्ति देता है।
माता-पिता की सेवा ही सच्ची तपस्या है;
उनका आशीर्वाद समस्त वेदों का सार है।
वीरता केवल शस्त्र में नहीं,
सत्य बोलने के साहस में भी है।
अन्याय को सहना उसे बढ़ावा देना है —
प्रतिरोध ही धर्म का प्रथम कर्तव्य है।
ज्ञान और शौर्य का संगम ही
एक आदर्श मनुष्य की पहचान है।
जो अपने गुरु के प्रति सच्चा हो,
उसे संसार की कोई शक्ति नहीं हरा सकती।
पृथ्वी पर जब-जब अधर्म का बोझ बढ़ा,
तब-तब दैवी शक्ति ने अवतार लिया।
क्रोध को साधो — वह तुम्हारा सबसे बड़ा शत्रु है;
जिसने उसे जीता, उसने सब कुछ जीता।
"फरसे की धार से नहीं, तप की अग्नि से जगत को झुकाया —
मैं योद्धा नहीं, धर्म का प्रहरी हूँ।"